ईरान ने अमेरिका से मांग की है कि वह इसराइल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करे। ईरान का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जो हाल ही में एक डील (MoU) हुई है, उसके तहत लेबनान में लड़ाई बंद होना बहुत जरूरी है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि वॉशिंगटन को इस स्थिति की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने इसराइल के हमलों को गलत बताया और कहा कि अमेरिका इस पूरी स्थिति के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने साफ किया कि ईरान अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
यह पूरा मामला 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच हुई एक अंतरिम डील से जुड़ा है। इस डील की पहली शर्त यही थी कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म की जाएगी। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इस डील की शर्तों को पूरा करवाए।
दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि वह लेबनान में अपनी सेना को पीछे नहीं हटाएंगे। उनके ऑफिस ने कहा कि इसराइल अपने सैनिकों पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा और Hezbollah को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। वहीं, इसराइल के मंत्री Itamar Ben Gvir ने भी कड़ी चेतावनी दी है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
हाल ही में लेबनान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में इसराइल ने कई हमले किए हैं, जिनमें एक लेबनानी सैनिक समेत सात लोगों की मौत हो गई। इसराइल का दावा है कि उन्होंने Hezbollah के 80 ठिकानों को निशाना बनाया है। इस तनाव की वजह से स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका और ईरान की परमाणु बातचीत भी टल गई है।
फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने भी अमेरिका से अपील की है कि वह इसराइल पर दबाव डाले ताकि डील का पालन हो सके। उन्होंने Hezbollah से भी हमले रोकने और हथियार छोड़ने को कहा है।