दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे ज़रूरी रास्ते Strait of Hormuz को लेकर बड़ी खबर आई है. अमेरिका के Treasury Secretary ने बताया कि ईरान ने अब यहाँ से जहाजों के आने-जाने के रास्ते को खुला रखने का वादा किया है. इस फैसले से दुनिया भर के तेल बाज़ार और समुद्री सुरक्षा में राहत मिलने की उम्मीद है.

22 जून 2026 को US Treasury Secretary Scott Bessent ने ऐलान किया कि ईरान ने Strait of Hormuz में मुक्त और खुले पारगमन (free and open transit) का भरोसा दिया है. यह बात स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के दौरान हुई, जिसका मकसद ईरान और दुनिया के बड़े देशों के बीच तनाव कम करना है. इसके साथ ही ईरान ने International Atomic Energy Agency (IAEA) के निरीक्षकों को देश में आने देने की बात भी मानी है.

इस्लामाबाद समझौता और उसके नियम

इससे पहले 17 और 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU)” पर साइन हुए थे. इस दस्तावेज़ पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसदीय स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने डिजिटल हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत Strait of Hormuz को तुरंत खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने की बात कही गई थी. इसमें यह भी तय हुआ कि ईरान 30 दिनों के अंदर समुद्र के नीचे बिछी सुरंगों (mines) जैसी सैन्य बाधाओं को हटाएगा और 60 दिनों तक यहाँ से जहाजों का गुज़रना मुफ्त रहेगा.

नियमों को लेकर विवाद और मौजूदा स्थिति

समझौते के बाद 19 जून को ईरान की Persian Gulf Strait Authority (PGSA) ने नए नियम जारी किए. अब जहाजों को पारगमन परमिट लेना होगा, ईरान के पास वाले रास्तों का इस्तेमाल करना होगा और PGSA द्वारा मान्यता प्राप्त बीमा रखना होगा. हालांकि, अमेरिका ने 27 मई 2026 को ही PGSA पर प्रतिबंध लगा दिए थे.

20 जून को हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब ईरान के Khatam al-Anbia सेंट्रल हेडक्वार्टर ने Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया. ईरान ने इसका कारण लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को बताया. लेकिन अमेरिकी सैन्य कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि रास्ता खुला है और उस दिन 55 जहाजों ने वहां से सफ़र किया.

फिलहाल 22 जून की स्थिति यह है कि जहाजों की आवाजाही जारी है. कुछ जहाज अमेरिकी सेना की देखरेख में दक्षिणी रास्ते से जा रहे हैं, तो कुछ ईरानी अधिकारियों से परमिट लेकर उत्तरी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच बातचीत का एक जरिया भी बनाया गया है ताकि किसी भी हादसे को रोका जा सके, हालांकि जहाजों की संख्या अभी युद्ध से पहले के स्तर जैसी नहीं हुई है.