ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच चल रहा युद्धविराम (ceasefire) अगले तीन दिनों में खत्म होने वाला है। इसी बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण वापस ले लिया है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या है पूरा मामला?
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ था, जिसकी समयसीमा 21 अप्रैल को खत्म हो रही है। इस डील को करवाने में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र ने अहम भूमिका निभाई। ईरान ने शांति के लिए 10 पॉइंट्स का एक प्लान दिया था, जिसे अमेरिका ने बातचीत के लिए आधार माना। अब मुख्य चर्चा इस बात पर है कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र से कब हटेगी और ईरान पर लगे प्रतिबंध कब खत्म होंगे।
Strait of Hormuz और शिपिंग पर क्या असर होगा?
ईरान ने एलान किया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर से अपना कंट्रोल ले लिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी (blockade) पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, यह समुद्री रास्ता खुला नहीं रहेगा। इस वजह से वहां से गुजरने वाले कई टैंकरों को वापस लौटना पड़ा। भारत ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है क्योंकि उसके कई टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं।
ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय पर समझौता नहीं हुआ तो फिर से बमबारी शुरू हो सकती है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र (UN) और सऊदी अरब ने इस युद्धविराम का स्वागत किया है। सऊदी अरब ने अमेरिका से लेबनान में भी शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि ईरान के साथ चल रही बातचीत पर बुरा असर न पड़े।
इस पूरे विवाद की मुख्य बातें नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| युद्धविराम शुरू होने की तारीख | 8 अप्रैल 2026 |
| युद्धविराम खत्म होने की तारीख | 21 अप्रैल 2026 |
| बिचौलिया देश | पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र |
| विवादित क्षेत्र | स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) |
| मुख्य विवाद | अमेरिकी बंदरगाह नाकाबंदी |
| प्रभावित देश | भारत (टैंकर शिपिंग) |
| ईरान की मांग | UN सुरक्षा परिषद का बाइंडिंग प्रस्ताव |
