ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्धविराम अब बड़े खतरे में दिखाई दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दोनों देशों के बीच हुआ समझौता सभी मोर्चों पर लागू होता है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी भी एक मोर्चे पर इस समझौते का उल्लंघन किया गया, तो इसे पूरे सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान ने इसके गंभीर परिणामों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है।

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ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर पर क्यों खड़ा हुआ नया विवाद?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में सीजफायर होना अमेरिका के साथ किसी भी शांति समझौते की सबसे पहली और मुख्य शर्त है। प्रवक्ता ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने 1 जून 2026 को दक्षिणी ईरान के एक बंदरगाह शहर पर हमला करके इस समझौते का उल्लंघन किया है।

इसके अलावा ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी और लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई को समझौते का सीधा उल्लंघन बताया है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से यह नाजुक युद्धविराम 8 अप्रैल 2026 से लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सैन्य टकराव लगातार जारी है।

पिछले 24 घंटों में इस क्षेत्र में क्या बड़े बदलाव हुए हैं?

1 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच सीधे हमले देखने को मिले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों पर बमबारी की, जिसके जवाब में ईरान ने उस एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया जहां से अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी थी।

दूसरी तरफ इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भारी हवाई हमलों का आदेश दिया है और लेबनान के ऐतिहासिक Beaufort Castle पर कब्जा करने की घोषणा की है। इस बिगड़ते हालात और बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौता कब शुरू हुआ था?

पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच यह समझौता 8 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था, जो इस समय काफी नाजुक स्थिति में है।

ईरान ने सीजफायर के उल्लंघन का जिम्मेदार किसे माना है?

ईरान ने साफ किया है कि किसी भी मोर्चे पर उल्लंघन की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इसराइल की होगी, जो लगातार लेबनान और अन्य क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।