ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम का समय, पाकिस्तान की कोशिशों पर ईरान ने उठाए सवाल
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान बीच-बचाव की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान ने इन कोशिशों पर शक जताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया को शांति की उम्मीद जगी है। हालांकि, ईरान की समाचार एजेंसी SNN ने कहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का तरीका नाकाम साबित हो रहा है।
ट्रंप का फैसला और पाकिस्तान का रोल क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक युद्धविराम की समयसीमा बढ़ा दी। यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की रिक्वेस्ट के बाद लिया गया। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यह युद्धविराम तभी काम करेगा जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से खोलेगा। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने ईरान का संदेश अमेरिका तक पहुंचाया, लेकिन ईरान का मानना है कि अमेरिकी तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।
ईरान की शर्तें और आर्थिक नुकसान की बात
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसकी समुद्री नाकेबंदी (naval blockade) नहीं हटाता, तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि इस नाकेबंदी की वजह से ईरान को हर दिन 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है और वह आर्थिक रूप से कमजोर हो रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, जिससे दुनिया के तेल बाजार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
बातचीत का अगला दौर और अन्य देशों की राय
आने वाले शुक्रवार को इस्लामाबाद में बातचीत का दूसरा दौर शुरू होगा। अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय प्लान को बातचीत का आधार मान लिया है। इस दो हफ्ते के युद्धविराम पर इसराइल ने भी अपनी सहमति दे दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने भी इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस ने चेतावनी दी है कि यह युद्धविराम बहुत नाजुक है और ईरान को ईमानदारी से बात करनी चाहिए।