ईरान-अमेरिका युद्ध विराम: पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तेहरान ने जताया आभार, ट्रंप ने लेबनान के लिए किया ऐलान

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। इस्लामाबाद की मदद से दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हुआ है, जिसके लिए ईरान ने पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया है। अब इस शांति को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा बातचीत की तैयारी चल रही है ताकि क्षेत्र में स्थिरता आ सके।

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पाकिस्तान ने कैसे कराई ईरान और अमेरिका की बातचीत?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाई। 8 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्ध विराम तय हुआ था। अब प्रधानमंत्री शरीफ कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मिलकर बातचीत के दूसरे दौर की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि लेबनान में शांति होना भी इन बातचीत के लिए जरूरी है।

अमेरिका और लेबनान के बीच क्या हुआ नया फैसला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्ध विराम का ऐलान किया है। यह फैसला 16 अप्रैल 2026 की शाम से लागू हुआ है। वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि लेबनान में शांति होना उतना ही जरूरी है जितना कि ईरान के लिए। अमेरिका के विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों के बीच अब भी परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

ईरान की क्या मांगें हैं और विवाद की मुख्य वजह क्या है?

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कई मुद्दों पर असहमति है। ईरान ने अपनी शर्तों की एक 10 सूत्रीय योजना पेश की है। मुख्य विवाद परमाणु कार्यक्रम और समुद्री रास्तों के नियंत्रण को लेकर है। नीचे दी गई टेबल में मुख्य मांगों और विवादों की जानकारी दी गई है:

मुख्य मुद्दे और मांगें विवरण
अमेरिकी सेना ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी की मांग की है
प्रतिबंध सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की शर्त रखी गई है
होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री रास्ते पर नियंत्रण का मुद्दा मुख्य है
हबेशल्लाह इजरायल द्वारा हिजबुल्लाह पर हमलों को रोकने की मांग
फ्रीज एसेट्स 6 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति वापस मांगी है
परमाणु कार्यक्रम अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए गारंटी की मांग की है
पोर्ट ब्लॉकेड अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पर विवाद है