ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि संघर्षविराम का फैसला शासन के सभी प्रमुख अंगों की आम सहमति और सुप्रीम लीडर की हरी झंडी के बाद लिया गया है। यह समझौता दो हफ्तों के लिए हुआ है और इसके पीछे पाकिस्तान की मध्यस्थता ने बड़ी भूमिका निभाई है। खाड़ी क्षेत्र में शांति की उम्मीदों के बीच अब दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू होने जा रही है।

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समझौते की मुख्य शर्तें और आगामी बैठक

बातचीत की जगह इस्लामाबाद, पाकिस्तान
बातचीत की तारीख 10 अप्रैल 2026
समझौते की अवधि दो सप्ताह (14 दिन)
ईरान का पक्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता की प्रतिबद्धता

ईरान के राष्ट्रपति ने बताया कि यह फैसला तब लिया गया जब अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय बातचीत के ढांचे को स्वीकार कर लिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडरों को भी इस प्रस्ताव पर राजी करने में सफलता हासिल की। सऊदी अरब ने इस कदम का स्वागत किया है लेकिन साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी पाबंदी के खुला रखने की मांग की है ताकि वैश्विक व्यापार पर कोई असर न पड़े।

क्षेत्र में तनाव और प्रवासियों की चिंता

भले ही संघर्षविराम की बात हो रही है, लेकिन ज़मीनी हालात अभी भी थोड़े चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। लेबनान में हो रहे इजरायली हमलों ने इस समझौते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहते हैं, तो संघर्षविराम का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि सुरक्षा बल अभी भी हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि हाल ही में कुछ ड्रोन हमलों को नाकाम किया गया है। खाड़ी देशों में शांति बनी रहने से भारत आने-जाने वाली फ्लाइट्स और नौकरीपेशा लोगों के लिए माहौल बेहतर रहने की उम्मीद है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.