ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हुई है. दोनों देशों के बड़े प्रतिनिधि वहां पहुंचे हैं, लेकिन ईरान ने बातचीत शुरू करने के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं. दूसरी तरफ, लेबनान में हालात बहुत खराब हो गए हैं और वहां का पूरा फूड सिस्टम पूरी तरह तबाह होने की कगार पर है.

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ईरान और अमेरिका की बातचीत में क्या है खास?

शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को यह बैठक शुरू हुई जिसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Qalibaf नेतृत्व कर रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि लेबनान में सीज़फायर हो और उसकी जमा संपत्ति वापस मिले, तभी बातचीत आगे बढ़ेगी. अमेरिका की ओर से अभी तक किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई है.

दोनों देशों ने क्या प्रस्ताव रखे हैं?

बातचीत के दौरान दोनों देशों ने अपनी शर्तें और प्रस्ताव पेश किए हैं, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:

पक्ष मुख्य प्रस्ताव/शर्तें
ईरान (10 सूत्री प्रस्ताव) युद्ध का स्थायी अंत, आर्थिक प्रतिबंधों की समाप्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण.
अमेरिका (15 सूत्री प्रस्ताव) ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना.

लेबनान में खाने-पीने का संकट क्यों बढ़ा?

UN की World Food Programme (WFP) ने चेतावनी दी है कि लेबनान अब एक बड़े खाद्य संकट की ओर बढ़ रहा है. वहां के हालात काफी गंभीर हैं:

  • दक्षिण लेबनान के 80% से ज्यादा बाजार अब काम नहीं कर रहे हैं.
  • पिछले एक महीने में सब्जियों के दाम 20% और ब्रेड के दाम 17% तक बढ़ गए हैं.
  • 2 मार्च 2026 से अब तक करीब 11 लाख लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं.
  • सीरिया जाने वाला मुख्य बॉर्डर रास्ता 4 अप्रैल से बंद है, जिससे मदद पहुंचने में दिक्कत हो रही है.

WFP के मुताबिक, कई व्यापारियों के पास अब एक हफ्ते से कम का राशन बचा है. अगर युद्ध तुरंत नहीं रुका और फंड नहीं मिला, तो वहां स्वास्थ्य और पानी की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाएगी.