अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध विराम अब संकट में दिख रहा है। ईरान के सरकारी टीवी ने साफ कहा है कि तेहरान शायद इस सीज़फायर को न माने और अपने हितों के हिसाब से फैसला लेगा। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध विराम की समय सीमा को छठी बार बढ़ा दिया है ताकि बातचीत पूरी हो सके।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है पूरा मामला?
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के सीज़फायर पर सहमति बनी थी। यह समझौता 2026 के ईरान युद्ध और Strait of Hormuz संकट के बाद किया गया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को इस सीज़फायर को फिर से बढ़ा दिया है। उन्होंने साफ किया कि यह तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपना औपचारिक शांति प्रस्ताव जमा नहीं कर देता और दोनों देशों की बातचीत पूरी नहीं हो जाती।
ईरान की क्या मांगें हैं और विवाद क्यों है?
ईरान ने शांति के लिए अपनी एक 10 सूत्रीय योजना पेश की है। ईरान की मुख्य मांगों में ये बातें शामिल हैं:
- Strait of Hormuz से जहाजों के रास्ते पर नियंत्रण।
- ईरान पर लगे सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना।
- यूरेनियम समृद्ध करने के अधिकार को मान्यता देना।
- युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे का भुगतान करना।
लेबनान को इस समझौते में शामिल करने को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद है। पाकिस्तान और ईरान का कहना था कि लेबनान इसमें शामिल है, लेकिन व्हाइट हाउस ने इस बात से इनकार किया।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों का क्या कहना है?
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका द्वारा सीज़फायर बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है और इसे तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका पर सीज़फायर तोड़ने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी सेना ने उनके एक जहाज को जब्त किया है, इसलिए वे अब दबाव या धमकी के साये में बातचीत नहीं करेंगे। इसी तनाव की वजह से उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा भी फिलहाल रोक दी गई है।
