ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक नया रास्ता निकाला गया है। ईरान ने ऐलान किया है कि वह एक नया कम्युनिकेशन चैनल बनाएगा ताकि दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MoU) के उल्लंघन पर चर्चा की जा सके। इस कदम का मकसद भविष्य में होने वाली गलतफहमियों और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाना है।
समझौते की मुख्य बातें
ईरान और अमेरिका ने 18 जून 2026 को 14 पॉइंट्स वाला एक अंतरिम समझौता किया था। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य युद्ध और सैन्य अभियानों को खत्म करना था, जिसमें लेबनान का मामला भी शामिल था। इस पूरी प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
ताजा घटनाक्रम
1 जुलाई 2026 को ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री ने बताया कि MoU के उल्लंघन की रिपोर्ट करने और उस पर चर्चा करने के लिए एक चैनल बनाया जाएगा। इसके बाद 3 जुलाई को दोहा में एक अहम बैठक हुई जिसमें ईरान, कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। इस बैठक में एक इमरजेंसी हॉटलाइन पर सहमति बनी है, जिसके 4 जुलाई तक चालू होने की उम्मीद है।
लेबनान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद
दोहा में हुई बैठक के दौरान ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने समझौते के क्लॉज 1 का पालन नहीं किया, जो लेबनान में संघर्ष खत्म करने से जुड़ा है। साथ ही, दोनों देशों के बीच आर्टिकल 5 को लेकर भी खींचतान रही है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षित रास्ता देने से संबंधित है।
इससे पहले 27-28 जून को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था। ईरान ने अमेरिका द्वारा अपनी तटीय निगरानी सुविधाओं पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की थी। जवाब में IRGC ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे।
सुरक्षा के इंतजाम
तनाव को देखते हुए 26 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सीधा संचार चैनल चालू किया गया था। इसका मकसद सैन्य घटनाओं को रोकना और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने जहाजों के पारगमन को मैनेज करने के लिए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ भी बनाई है।
