ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस महीने अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 35 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 300 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता Hossein Kermanpour ने बताया कि केवल 15 जुलाई को हुई रात भर की बमबारी में 260 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
हमलों का मुख्य कारण और सरकारी बयान
अमेरिकी सैन्य मुख्यालय CENTCOM ने जानकारी दी है कि ये हमले हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने 15 जुलाई से ईरानी तटों पर फिर से नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है। Admiral Brad Cooper का कहना है कि ईरान ने सात कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था, जिससे कई क्रू मेंबर्स की जान गई। इन हमलों में ईरान के मिसाइल, ड्रोन साइट्स और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
गल्फ देशों पर असर और आगे का खतरा
इस संघर्ष की आंच अब कुवैत, बहरीन और जॉर्डन तक पहुंच गई है। 15 जुलाई को इन देशों ने अपनी सीमाओं पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने की पुष्टि की है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी ली है, जबकि ईरान की सेना ने Iranshahr के पास हुए अमेरिकी हमले में अपने 7 सैन्य कर्मियों के मारे जाने की जानकारी दी है। राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्ते में ईरान के पावर प्लांट और पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
