पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बुधवार 15 जुलाई 2026 को कहा कि अब ईरान का ध्यान सिर्फ अपने बचाव पर है। ईरान ने उन पुराने समझौतों को भी मानने से मना कर दिया है जो 17 जून को अमेरिका के साथ शांति के लिए किए गए थे।

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सैन्य हमलों का दौर और गहराता संकट

अमेरिका ने बुधवार 15 जुलाई और गुरुवार 16 जुलाई की सुबह तक ईरान के तटीय ठिकानों, मिसाइल स्टोर और Strait of Hormuz के पास सैन्य अड्डों पर भारी हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान शांति वार्ता में वापस नहीं आता है, तो अगले हफ्ते से ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिका ने ईरान पर नया नौसैनिक प्रतिबंध भी लगा दिया है और Treasury Department ने कई रूसी और नाइजीरियाई संस्थाओं पर भी कार्रवाई की है।

दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई

इस हमले के जवाब में IRGC ने बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन ने तीन ईरानी मिसाइलों को हवा में मार गिराने का दावा किया है। इराक के Erbil में भी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास धमाकों की सूचना मिली है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी हमलों में 35 लोगों की जान गई है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर स्थितियां नहीं सुधरीं, तो वे मिडिल ईस्ट से होने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह से बंद कर देंगे।

Sushma Kumari

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