अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। 22 जुलाई 2026 को ईरान के दूत ने कहा कि युद्ध की गंभीरता मौतों की संख्या से नहीं बल्कि उसके प्रभाव से तय होती है। पिछले 11 दिनों से लगातार अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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युद्ध का बढ़ता दायरा और सैन्य तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया है कि अभी और हमले किए जा सकते हैं और ईरान को हुए नुकसान से उबरने में करीब दो दशक लग सकते हैं। अमेरिका अब नतांज़ के पास स्थित एक भूमिगत परिसर को निशाना बनाने की तैयारी में है। ईरान के Khatam Al-Anbiya सैन्य कमांड ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों का विस्तार होने पर वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों पर हमला करेंगे।

राजनयिक कोशिशें और आर्थिक प्रभाव

तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने संयम बरतने की अपील की है, हालांकि ईरान के मुख्य वार्ताकार Abbas Araghchi ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान बम के खतरे के साये में कोई समझौता नहीं करेगा। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने सीनेट के सामने इस युद्ध के लिए 67 अरब डॉलर की आपातकालीन फंडिंग की मांग रखी है। इस बीच, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने भी ईरान की ओर से आए हमलों को रोकने का दावा किया है, जबकि पूर्व अमेरिकी दूत Keith Kellogg ने जमीनी हमले की सलाह दी है।

Nura Basta

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