अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बड़े टकराव का रूप ले चुका है। ईरान ने अमेरिका पर अपनी ज़मीन पर गैरकानूनी हमले करने का आरोप लगाया है, जिसके जवाब में उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले के दौरान कुवैत की सेना ने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया।
ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप
ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने 9 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को एक चिट्ठी लिखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर जो सैन्य हमले किए हैं, उसकी पूरी ज़िम्मेदारी अमेरिका की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के बुशहर और फारस की खाड़ी के कई द्वीपों पर बड़े हमले किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है।
ईरान के मुताबिक, इन हमलों में उसकी वायु सेना और नौसेना के 8 जवान मारे गए। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने जून 2026 में हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ समझौते को तोड़ दिया है। इस समझौते में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई न करने का वादा किया था। साथ ही, ईरान ने अमेरिकी खजाने विभाग द्वारा तेल बिक्री के लाइसेंस रद्द करने को भी समझौते का उल्लंघन बताया है।
अमेरिका की दलील और ट्रंप का बयान
अमेरिका ने इन हमलों का कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों को बताया है। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान की उन क्षमताओं को कम करने के लिए ये हमले किए जिससे वह समुद्री रास्तों को खतरा पहुँचा सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में हुए युद्धविराम समझौते को खत्म कर दिया है और संकेत दिया है कि आगे भी ऐसे हमले हो सकते हैं।
कुवैत और बहरीन में तनाव
इस विवाद के बीच ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत की सेना ने जानकारी दी कि उन्होंने 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 13 दुश्मन ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द बातचीत शुरू करें और विवादों को बातचीत से सुलझाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह लड़ाई पूर्ण युद्ध में बदल गई, तो इसके नतीजे बहुत विनाशकारी होंगे।
