ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। 1 जून 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किए गए जवाबी हमलों का विरोध किया गया था। इसी तनाव के बीच कुवैत के हवाई सुरक्षा तंत्र ने सोमवार सुबह अपनी सीमा की तरफ आ रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही मार गिराया है।

ईरान ने यूरोपीय संघ पर क्या आरोप लगाए हैं?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने यूरोपीय संघ के रुख को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और दोहरा रवैया बताया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करना चाहिए और हमलावरों का साथ देने के बजाय उन देशों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए जो अपनी रक्षा में कदम उठा रहे हैं। ईरान ने साफ किया है कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत उसे आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और उसने केवल उन्हीं ठिकानों पर कार्रवाई की है जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जा रहा था।

क्या है इस सैन्य टकराव की असली वजह?

इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक द्वीप पर बने एक टेलीकॉम टावर पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान की सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उस सैन्य ठिकाने पर ड्रोन और मिसाइल दागे जहां से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चलाए जा रहे थे। इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उन्होंने ईरान के केश्म द्वीप और गेरुक इलाके में हमले किए थे क्योंकि ईरान ने अमेरिका का एक MQ-1 ड्रोन मार गिराया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों में अलर्ट जारी है और कुवैत ने भी अपने हवाई सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच ताजा विवाद क्यों शुरू हुआ?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक द्वीप पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान की सेना ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

कुवैत का इस विवाद में क्या संबंध सामने आया है?

कुवैत की सीमा सुरक्षा बलों ने 1 जून 2026 की सुबह अपनी सीमा में आ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही रोक दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।