8 जुलाई 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया। इस दौरान ईरान के एक रेलवे ब्रिज पर हमला हुआ और दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस लड़ाई की चपेट में बहरीन और कुवैत जैसे देश भी आए हैं जिससे पूरे क्षेत्र में डर का माहौल है।
ईरान के सरकारी मीडिया और अन्य समाचारों के अनुसार, 8 जुलाई को देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक रेलवे ब्रिज पर हमला हुआ। हालांकि, ईरान के स्टेट टेलीविजन ने इस हमले के लिए उत्तर-पश्चिमी इलाके का भी जिक्र किया है। इस हमले में कितने लोग मरे या कितना नुकसान हुआ, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई
इसी दिन अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले किए। US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए की गई।
अमेरिकी हमलों में ये चीजें शामिल थीं:
- ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय रडार साइट्स को तबाह किया गया।
- एंटी-शिप मिसाइल हथियारों और कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क पर हमला हुआ।
- ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की 60 से ज्यादा छोटी नावों को नष्ट कर दिया गया।
इस बीच अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाला लाइसेंस भी रद्द कर दिया। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम युद्धविराम अब खत्म हो चुका है।
ईरान का पलटवार और नुकसान
अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर बड़े हमले किए। ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन के Salman Port और कुवैत के Ali Al Salem Air Base सहित कुल 85 ठिकानों को निशाना बनाया।
कुवैत सरकार ने बताया कि उन्होंने ईरान की तरफ से आई 2 बैलिस्टिक मिसाइलों और 13 ड्रोन को हवा में ही रोक दिया।
वहीं ईरान के अंदर भी काफी नुकसान हुआ। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि Bandar Abbas, Sirik और Bushehr जैसे दक्षिणी बंदरगाह शहरों में बड़े धमाके हुए। अमेरिकी हमलों की वजह से Bandar Abbas और Bushehr में ईरान की सेना के वायु और नौसेना बल के 8 जवान मारे गए।
