Strait of Hormuz Update: ईरान ने फिर कड़ा किया पहरा, जहाजों को रोका और अमेरिका ने पकड़ा ईरानी जहाज, दुनिया भर में मचेगी हलचल

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। ईरान ने Strait of Hormuz पर अपना कंट्रोल बहुत कड़ा कर दिया है। कुछ समय के लिए यह रास्ता खुला था लेकिन अब यहां फिर से पाबंदियां लगा दी गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस बात को लेकर भारी खींचतान चल रही है जिससे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

ईरान ने रास्ते पर क्यों लगाई पाबंदी और अमेरिका का क्या कहना है?

ईरान ने पहले 17 अप्रैल को रास्ता खुला रखने का ऐलान किया था लेकिन 18 अप्रैल को उसने अपना फैसला बदल दिया और फिर से सख्त नियम लागू कर दिए। अब ईरान चाहता है कि जो भी जहाज यहां से गुजरे वो उसकी पूरी जानकारी दें, परमिट लें और सुरक्षा के नाम पर फीस भरें।

दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया है कि ईरान अमेरिका को ब्लैकमेल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह जारी रहेगी और वो ईरान की इन शर्तों को नहीं मानेंगे।

जहाजों पर हमले और भारत पर क्या असर हुआ?

19 अप्रैल को ईरान ने बोत्सवाना और अंगोला के दो तेल जहाजों को वापस भेज दिया क्योंकि उनके पास सही परमिट नहीं थे। इसी दिन अमेरिका ने ‘Touska’ नाम के एक ईरानी कार्गो जहाज को पकड़ लिया। इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वो इसका जवाब जरूर देगा।

भारत के लिए भी खबर चिंताजनक है क्योंकि 18 अप्रैल को दो भारतीय जहाजों पर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने फायरिंग की। इस वजह से जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। भारत सरकार ने इस मामले में ईरान के पास अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

तारीख क्या घटना हुई
28 फरवरी 2026 ईरान पर युद्ध की शुरुआत हुई
17 अप्रैल 2026 Strait of Hormuz कुछ समय के लिए खुला
18 अप्रैल 2026 ईरान ने फिर से सख्त पाबंदियां लगाईं
19 अप्रैल 2026 अमेरिका ने ‘Touska’ जहाज पकड़ा और बोत्सवाना-अंगोला जहाजों को रोका
20 अप्रैल 2026 ईरान ने दुनिया को आर्थिक नुकसान की चेतावनी दी

आने वाले समय में क्या हो सकता है?

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ ने कहा है कि अगर दबाव कम नहीं हुआ तो दुनिया को भारी कीमत चुकानी होगी। वहीं दक्षिण कोरिया के लिए जा रहा ‘Odessa’ नाम का एक जहाज रास्ता पार कर चुका है जो पिछले कई हफ्तों में पहला बड़ा शिपमेंट है।

UKMTO और IMO जैसी संस्थाओं ने इस इलाके को बहुत खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि यहां जहाजों पर हमले का खतरा बहुत ज्यादा है और किसी भी छोटी गलती से बड़ा हादसा हो सकता है।