ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर है। एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच शांति समझौते की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के सैन्य कमांडर और अमेरिकी सेना के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की चर्चा
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने 13 जून 2026 को कहा कि अमेरिका के साथ एक संभावित समझौता अब पहले से कहीं ज़्यादा करीब है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस समझौते की शर्तों को लेकर अटकलें न लगाई जाएं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक 60 दिनों के युद्धविराम (ceasefire) के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (enrichment) पर बातचीत हो सकती है।
- परमाणु क्षमता: ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमताओं को बरकरार रखना चाहता है और किसी भी अंतिम समझौते में इस बात पर जोर दिया जाएगा।
- मुआवजा: IRNA न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान ने मुआवजे के लिए एक व्यावहारिक तरीका तैयार किया है और तीसरे देशों से इसकी गारंटी भी ली है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा।
ईरानी कमांडर की चेतावनी और तैयारी
शांति की बातों के बीच ईरान के सैन्य कमांडरों का रुख सख्त रहा। एक ईरानी कमांडर ने जनता के समर्थन का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमलावरों के खिलाफ जीत हासिल करेंगे। IRGC ने बयान जारी कर कहा कि ईरान पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत है और उसकी सेना किसी भी निर्णायक जवाब के लिए तैयार है। इससे पहले IRGC कमांडर Brigadier General Ahmad Vahidi ने किसी भी नए हमले पर विनाशकारी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी थी।
ड्रोन हमले और अमेरिका का रुख
तनाव तब और बढ़ गया जब 13 जून 2026 को US Central Command ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की ओर बढ़ रहे कई ईरानी ड्रोन को मार गिराया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Trump ने ईरान के मीडिया द्वारा बताए गए समझौते की शर्तों से इनकार किया है। उनका कहना है कि लिखित में तय की गई शर्तें और ईरानी मीडिया की खबरें एक जैसी नहीं हैं। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
