ईरान और अमेरिका के बीच एक नया समझौता हुआ है, लेकिन ईरान अब अमेरिका से अपने वादे पूरे करने की मांग कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ़ कहा है कि वे केवल बातों पर भरोसा नहीं करेंगे बल्कि असल काम देखेंगे। इसी बीच तनाव बढ़ गया है और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से बंद कर दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने शनिवार, 20 जून 2026 को बताया कि ईरान का तरीका अब “वादे के बदले वादा” वाला होगा। उन्होंने साफ़ किया कि किसी भी समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे लागू कैसे किया जाता है। बाक़ई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता है, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा।
जानकारी के मुताबिक, 17 जून 2026 को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल तरीके से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। बाक़ई ने कहा कि आगे की बातचीत तभी होगी जब अमेरिका इस MoU के आर्टिकल 1, 4, 5, 10 और 11 में लिखी शर्तों को पूरा करना शुरू करेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पुराने अनुभवों को ईरान भूला नहीं है जब अमेरिका ने अपने वादे तोड़े थे।
इस मामले को सुलझाने के लिए ईरान का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुँचा है। इस टीम में संसदीय स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi शामिल हैं। 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में बातचीत का दौर शुरू हुआ, जहाँ अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी शामिल हुए। इस बातचीत का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि अमेरिका अपने वादों को कैसे पूरा करेगा।
दूसरी तरफ, लेबनान में इजरायली हमलों के विरोध में ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से बंद करने का फैसला किया है, जबकि शुरुआती समझौते में इसे खुला रखने की बात कही गई थी। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान के हालात ठीक नहीं होते, बातचीत में प्रगति मुश्किल है। इस पूरे समझौते में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भरोसा जताया है कि इस समझौते के नतीजे जल्द ही सामने आएंगे और यह ईरान के लिए फायदेमंद साबित होगा। इस डील में अमेरिका द्वारा ईरान की जमी हुई संपत्ति वापस करने और प्रतिबंधों में ढील देने जैसी अहम बातें शामिल हैं।
