ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने एक समझौते (MoU) पर डिजिटल साइन किए हैं। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा है कि ईरान इस समय बहुत मजबूत स्थिति में है और इसी मजबूती के साथ अमेरिका से बात कर रहा है।

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गालिबाफ ने प्रेस टीवी को दिए इंटरव्यू में बताया कि अमेरिका और इसराइल के खिलाफ हालिया लड़ाई में ईरान की जीत हुई है। उन्होंने इसे सच्चाई और झूठ के बीच की जंग बताया और कहा कि ईरान ने अमेरिका और इसराइल को उनके मकसद पूरा नहीं करने दिए। गालिबाफ ने यह भी कहा कि वह अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं करते और उनके सैनिक हमेशा तैयार हैं।

Strait of Hormuz और पाकिस्तान की भूमिका

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति अब ईरान के पक्ष में आ गई है। खबर है कि 19 जून को इसे पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच बीच-बचाव करके समझौता कराने में बड़ी मदद की है।

समझौते की मुख्य बातें

इस समझौते में दोनों देशों ने कई शर्तों पर सहमति जताई है, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में समझा जा सकता है:

पक्ष मुख्य शर्तें और वादे
अमेरिका (US) समुद्री नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाना, ईरान के पास से अपनी सेना हटाना, 300 अरब डॉलर का आर्थिक मदद प्लान, सभी प्रतिबंध हटाना और ईरानी तेल के निर्यात की अनुमति देना।
ईरान (Iran) 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों को मुफ्त और सुरक्षित रास्ता देना, IAEA की निगरानी में परमाणु सामग्री का निपटारा करना।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जून को इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इसका औपचारिक कार्यक्रम शुक्रवार, 19 जून को होने की उम्मीद है।