ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ़ किया है कि नए समझौते (MoU) में अमेरिका और इसराइल को एक ही पक्ष माना गया है, जबकि दूसरी तरफ ईरान और Hezbollah हैं। उनका कहना है कि लेबनान में लड़ाई का खत्म होना इस पूरे शांति समझौते का सबसे जरूरी हिस्सा है।

समझौते की शुरुआत और स्विट्ज़रलैंड में बातचीत

विदेश मंत्री Araghchi ने बताया कि अमेरिका के साथ हुए इस समझौते को शुक्रवार 19 जून 2026 से लागू किया जाएगा। इसी तारीख को स्विट्ज़रलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का एक नया दौर भी शुरू होगा।

इसराइल को चेतावनी और अमेरिका की जिम्मेदारी

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने लेबनान पर हमला किया या वहां अपनी सेना तैनात रखी, तो इसे अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते को सही से लागू करवाने की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की है और उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि इसराइल लेबनान पर हमले बंद करे।

क्षेत्रीय नेताओं से चर्चा

इस मामले पर विदेश मंत्री Araghchi ने सऊदी अरब, मिस्र और इराक के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की। साथ ही उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और संसद स्पीकर Nabih Berri को भी समझौते की शर्तों के बारे में जानकारी दी और इलाके में शांति बनाए रखने पर जोर दिया।

समझौते (MoU) की मुख्य बातें

इस समझौते में कुल 14 आर्टिकल शामिल किए गए हैं, जिनकी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • सभी मोर्चों पर तुरंत युद्ध विराम लागू करना।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोलना।
  • ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को खत्म करना।
  • परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय करना।

लेबनान के मौजूदा हालात

अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून 2026 को शांति समझौते की घोषणा हुई थी, जिसके बाद 15 जून को लेबनान में लड़ाई काफी कम हो गई। हालांकि, कुछ इलाकों में झड़पें जारी रहीं। इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ़ कहा है कि उनकी सेना दक्षिण लेबनान के उन इलाकों में बनी रहेगी जिन्हें उन्होंने कब्जे में लिया है। वहीं, Hezbollah ने इस समझौते का स्वागत किया है और इसे इसराइल की वापसी की शुरुआत माना है।