ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में एक बड़ी बैठक हुई है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई इस बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है, जिससे दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते की उम्मीद जगी है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा है कि भविष्य की बातचीत के लिए नींव रख दी गई है और अब समझौते के लिए असली मेहनत शुरू हो चुकी है।

समझौते की मुख्य बातें

  • दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
  • राजनीतिक निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा।
  • लेबनान में सैन्य अभियान रोकने के लिए लेबनानी सरकार के साथ मिलकर एक ‘डीकन्फ्लिक्शन सेल’ बनाया जाएगा।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक सीधी संचार लाइन शुरू की जाएगी।

तेल और प्रतिबंधों पर बड़ी राहत

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिनों की छूट देने की तैयारी कर रहा है। इस कदम से ईरान के सेंट्रल बैंक को अपना तेल बेचने की अनुमति मिल सकेगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि लेबनान में संघर्ष खत्म करने और ईरान पर आर्थिक दबाव कम करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

तनाव और चुनौतियाँ

बातचीत के दौरान कुछ कड़े रुख भी सामने आए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा या लेबनान में ईरानी समर्थक समूह परेशानी खड़ी करेंगे, तो वह फिर से सैन्य हमले कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो वह इस समुद्री रास्ते पर अमेरिकी टोल टैक्स लगा सकते हैं।

फिलहाल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे मुद्दे अभी भी विवादित हैं। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई इस बैठक के बाद अब तकनीकी स्तर पर चर्चा पूरे हफ्ते जारी रहेगी।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.