अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिससे पूरी दुनिया में शांति की उम्मीद जगी है। इस डील को करवाने में कतर और पाकिस्तान ने बीच-बचाव का अहम काम किया है। अब दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और व्यापार फिर से शुरू होने की संभावना है।
स्विट्जरलैंड में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर
19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक तौर पर दस्तखत होने वाले हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस दस्तावेज़ को एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह देश के धैर्य और सही कूटनीति का नतीजा है। राष्ट्रपति ने कतर के अमीर Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से फोन पर बात की और तनाव कम करने में उनकी भूमिका की तारीफ की।
60 दिनों की बातचीत और नाकाबंदी खत्म
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने जानकारी दी कि 18 जून से दोनों देशों के बीच 60 दिनों की बातचीत का समय शुरू हो गया है। इसी के साथ अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली है जिससे Strait of Hormuz से अब दर्जनों जहाज आसानी से गुजर रहे हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह समझौता भविष्य की बातचीत के लिए एक मजबूत बुनियाद है।
तेल की कीमतों और बाजार पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि वह उम्मीद करते हैं कि इस डील के बाद सभी मोर्चों पर पूरी तरह से युद्धविराम होगा जिसमें इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच की जंग भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते की खबर से शेयर बाजार में सुधार हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है।
परमाणु निरीक्षण और अन्य शर्तें
IAEA ने कहा है कि वह इस समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद करेगा। ईरान ने भी अपनी परमाणु साइटों के निरीक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को बुलाने का फैसला किया है। इस डील के तहत सभी सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने की बात कही गई है।