अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिससे दोनों देशों के बीच चल रही लड़ाई खत्म होगी। पाकिस्तान की मदद से एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है जिसके तहत ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा ली जाएगी। अब Strait of Hormuz को दोबारा खोला जाएगा ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।

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15 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस समझौते की पुष्टि की। इस डील के तहत अगले 60 दिनों के लिए युद्धविराम रहेगा। इस दौरान दोनों देश परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने जैसे बड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे। ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने इस समझौते को मंजूरी दे दी है।

जहाजों के लिए नए नियम और परमिट

ईरान ने इस समुद्री रास्ते के प्रबंधन के लिए एक नई संस्था ‘Persian Gulf Strait Authority’ (PGSA) बनाई है। अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने के लिए कुछ कड़े नियमों का पालन करना होगा:

  • जहाज चलाने वालों को 48 घंटे पहले PGSA.ir पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
  • मिलने वाला परमिट सिर्फ एक बार के सफर के लिए होगा और 5 दिन तक मान्य रहेगा।
  • ईरान सरकार ने ऐलान किया है कि पहले 60 दिनों तक ट्रांजिट फीस और बीमा का खर्च वह खुद उठाएगी।

ईरान ने साफ़ निर्देश दिए हैं कि सभी जहाजों को लारक आइलैंड के पास वाले उत्तरी रास्ते का ही इस्तेमाल करना होगा। किसी भी दूसरे रास्ते से जाने की अनुमति नहीं होगी।

रास्ते को लेकर मची उलझन

एक तरफ ईरान उत्तरी रास्ते की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ Joint Maritime Information Centre (JMIC) ने जहाजों को ओमान के पानी वाले दक्षिणी रास्ते से जाने की सलाह दी है। JMIC का कहना है कि दक्षिणी रास्ता हमेशा खुला रहता है, लेकिन वहां समुद्री बारूदी सुरंगें (mines) हो सकती हैं। इस वजह से जहाज चलाने वालों के सामने अब बड़ी उलझन खड़ी हो गई है कि वे किस रास्ते को चुनें।

International Maritime Organization के महासचिव Arsenio Dominguez ने इस मामले में कहा है कि समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी एक बुनियादी सिद्धांत है जिसे बनाए रखना जरूरी है।