ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की पूरी ज़िम्मेदारी अब सिर्फ ईरान की है। इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के खुलने से दुनिया भर के व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ेगा।

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विदेश मंत्री Araghchi ने 28 जून 2026 को इराक दौरे के दौरान यह बात कही। उन्होंने साफ़ कर दिया कि इस रास्ते को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया में किसी भी दूसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था का कोई दखल नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई दूसरा रास्ता या नया इंतज़ाम करने की कोशिश की गई, तो इससे मामला और उलझ सकता है और इलाके में तनाव बढ़ सकता है।

समझौते की मुख्य बातें

18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) जारी किया गया था। इस दस्तावेज़ के अनुसार:

  • ईरान अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करेगा और कोई चार्ज नहीं लेगा।
  • भविष्य में इस रास्ते के मैनेजमेंट के लिए ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ बातचीत की जाएगी।
  • अमेरिका का कहना है कि यह रास्ता पूरी तरह टोल-फ्री रहेगा, लेकिन ईरान ने इसे ‘टोल’ न कहकर ‘मैरीटाइम सर्विस फीस’ (समुद्री सेवा शुल्क) कहा है।

बढ़ता तनाव और हालिया घटनाएँ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए थे, जिसकी वजह से समुद्री व्यापार ठप हो गया था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच सैन्य हमले रोकने और नेविगेशन बहाल करने का एक ढांचा तैयार किया गया था।

तनाव तब फिर बढ़ गया जब 28 जून को एक सिंगापुर के झंडे वाले कंटेनर जहाज़ पर हमला हुआ। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान ने इन दावों को गलत बताया है। इसी बीच ईरान ने ओमान द्वारा दिए गए एक वैकल्पिक शिपिंग कॉरिडोर के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है।