ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक शुरुआती समझौता हुआ है। इसके तहत Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा, जिससे वहां फंसे करीब 20,000 नाविकों के लिए अपने घर लौटने की उम्मीद जगी है। यह खबर उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है जो महीनों से अपने अपनों का इंतजार कर रहे थे।
शांति समझौते की तैयारी
सोमवार, 15 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच यह शुरुआती डील हुई। अब शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में औपचारिक तौर पर शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया कि शुक्रवार तक Strait of Hormuz पूरी तरह खुल जाएगा। इसके लिए अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी खत्म करने का फैसला किया है, वहीं ईरान भी अपना ‘टोल बूथ’ सिस्टम हटा लेगा।
नाविकों की घर वापसी और सुरक्षा
इस युद्ध की वजह से करीब 20,000 नाविक पिछले कई महीनों से फंसे हुए थे। International Chamber of Shipping (ICS) के Secretary-General Thomas Kazakos ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह उन समुद्री कर्मियों के लिए बड़ी राहत है जो इस जंग के बीच फंस गए थे। UN की International Maritime Organization (IMO) के Secretary-General Arsenio Dominguez ने बताया कि फंसे हुए नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है, हालांकि सुरक्षा गारंटी तय करने में थोड़ा समय लग सकता है।
भारतीय नाविकों पर असर
भारत के नाविकों के लिए भी यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है। Forward Seamen’s Union of India के General Secretary Manoj Yadav ने इस समझौते का स्वागत किया और बताया कि वहां बड़ी संख्या में भारतीय नाविक फंसे हुए हैं, जिन्हें अब जल्द ही घर वापस लाया जा सकेगा।
युद्ध का असर और मौजूदा स्थिति
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर 46 हमले हुए, जिनमें 14 नाविकों की जान चली गई। फिलहाल करीब 500 जहाज Strait of Hormuz से गुजरने के लिए इंतजार कर रहे हैं। इस डील में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की बात भी शामिल है, हालांकि इसराइल ने कहा है कि वह इन शर्तों से बंधा नहीं है।
मुख्य विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| समझौते की तारीख | 15 जून 2026 |
| औपचारिक साइनिंग | 19 जून 2026 (स्विट्जरलैंड) |
| फंसे हुए नाविक | लगभग 20,000 |
| इंतजार कर रहे जहाज | करीब 500 |
| कुल हमले | 46 |
| कुल मौतें | 14 नाविक |