अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर ईरान ने साफ की बात, कहा मध्यस्थों की कमी नहीं है असली वजह.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा बयान सामने आया है। 17 अगस्त 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच विवाद को सुलझाने में मध्यस्थों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि असली रुकावट कुछ और ही है जो समझौते के रास्ते में आ रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 60 दिनों का एक समझौता यानी MoU खत्म हो गया है। यह समझौता 18 जून को साइन किया गया था, लेकिन इससे ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम या फिर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर कोई पक्का फैसला नहीं निकल पाया।
पाकिस्तान, कतर और ओमान निभा रहे हैं भूमिका
इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए क्षेत्रीय देश लगातार कोशिश कर रहे हैं। Pakistan, Qatar और Oman जैसे देश लगातार दोनों तरफ संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद तेहरान ने साफ कर दिया है कि इस समय सीजफायर को आगे बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले पुराने समझौते का सम्मान करना होगा और उसे पूरी तरह मानना होगा। तेहरान के अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ अमेरिका और इस्राइल का एक बहाना था ताकि वे किसी बड़े सैन्य टकराव से पहले वक्त खींच सकें।
अब्बास अराची और राष्ट्रपति पेजेश्कियन का बयान
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने जानकारी दी है कि बातचीत को दोबारा शुरू करने को लेकर अभी तक कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। वहीं दूसरी तरफ देश के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह जरूर माना है कि इस समय हालात बहुत संवेदनशील हैं और अगर सही कदम उठाए जाएं तो एक संभावित समझौता हो सकता है। क्षेत्रीय रिश्ते तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब Canada ने ईरान के 5 वरिष्ठ अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए। इस कदम के बाद ईरानी प्रवक्ता ने कनाडा पर बड़ा हमला बोलते हुए उसे अमेरिका के रणनीतिक इशारों पर काम करने वाला एक छोटा देश करार दिया। खाड़ी देशों में रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों के लिए भी इस तनाव पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है।