ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब खत्म होती दिख रही है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक अहम समझौते (MoU) पर साइन किए हैं। इस फैसले से ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और वहां के लोगों की मुश्किलों में कमी आएगी।
ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर हुए साइन
राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि यह समझौता एक शक्तिशाली ईरान का संदेश है और शांति तभी आएगी जब दोनों पक्ष एक-दूसरे का सम्मान करेंगे। यह समझौता राष्ट्रपति Pezeshkian और Donald Trump के बीच डिजिटल तरीके से साइन किया गया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस समझौते को लागू करके देखा जाए कि यह कितना कारगर है।
पैसों और तेल का बड़ा अपडेट
इस समझौते के बाद ईरान को बड़ा आर्थिक फायदा मिला है। राष्ट्रपति ने बताया कि कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर अब अनफ्रीज कर दिए गए हैं, जिससे यह पैसा वापस ईरान आएगा। इसके साथ ही ईरान ने हाल के दिनों में 16 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल का निर्यात किया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| समझौते का नाम | MoU (ऐतिहासिक दस्तावेज़) |
| हस्ताक्षरकर्ता | Masoud Pezeshkian और Donald Trump |
| कतर से मिलने वाली राशि | 6 अरब डॉलर |
| तेल निर्यात | 16 मिलियन बैरल से ज़्यादा |
| मुख्य शर्त | परमाणु बम नहीं बनाना |
| समझौता तारीख | 18 जून 2026 |
| त्रिपक्षीय बैठक | 20 जून 2026 |
देश के अंदर की तैयारी और शर्तें
20 जून 2026 को राष्ट्रपति Pezeshkian ने सरकार, संसद और न्यायपालिका के प्रमुखों के साथ एक बैठक की। इसमें संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf भी मौजूद थे, जो अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार हैं। इस बैठक में युद्ध के बाद देश को फिर से खड़ा करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने पर चर्चा हुई।
अमेरिका ने इस समझौते में केवल एक मुख्य शर्त रखी है कि ईरान परमाणु बम नहीं बनाएगा। इसके अलावा इस MoU में क्षेत्रीय युद्धविराम, आर्थिक सहयोग और प्रतिबंधों में ढील देने जैसी बातें शामिल हैं।
वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका के रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौते का पालन नहीं किया, तो अमेरिकी सेना फिर से समुद्री नाकाबंदी (naval blockade) कर सकती है।
