ईरान के टॉप नेगोशिएटर मोहम्मद बाक़र गालिबाफ ने साफ़ कह दिया है कि अब एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हॉर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है। इसी बीच ओमान के दुक्म पोर्ट पर अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के IRGC ने बड़ा हमला किया है।
विवाद की मुख्य वजह
जून 2026 के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था, जिसका मकसद 60 दिनों के लिए युद्धविराम करना और शांति डील पर बात करना था। इस समझौते के आर्टिकल 5 में यह लिखा था कि ईरान 60 दिनों तक हॉर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता देगा और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लेगा।
लेकिन अब इस बात को लेकर दोनों देशों में मतभेद हो गए हैं। ईरान का कहना है कि स्ट्रेट पर उसका अधिकार है और सभी जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। वहीं अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होनी चाहिए।
ईरान की सख्त चेतावनी
गालिबाफ ने पिछले कुछ हफ़्तों में कई बार अपनी बात दोहराई है। उन्होंने 23 जून को कहा था कि यह स्ट्रेट अब पुराने हालात में कभी वापस नहीं जाएगा और इसे ईरान के नियमों के हिसाब से चलाया जाएगा। उन्होंने इसे अपनी शक्ति का सबसे बड़ा जरिया बताया। 8 जुलाई को उन्होंने अमेरिका पर MoU के नियमों को तोड़ने और नए प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया और कहा कि दादागिरी का दौर अब खत्म हो गया है।
मिलिट्री एक्शन और मौजूदा हालात
तनाव इतना बढ़ चुका है कि CENTCOM ने ईरान के सैन्य सप्लाई रास्तों पर हमले किए हैं। वहीं IRGC ने ओमान के समुद्री इलाकों में व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की है।
- ईरान ने साफ़ किया है कि जब तक MoU की शर्तें पूरी नहीं होतीं, वह कोई बड़ी बातचीत नहीं करेगा।
- ओमान के दुक्म पोर्ट पर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर सपोर्ट प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाया गया।
- तमाम हमलों के बावजूद, कतर की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है।
