अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब खत्म हो सकती है। दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर बात चल रही है जिससे युद्ध रुक सकता है। इस खबर के बाद दुनिया भर की नजरें अब इस डील पर टिकी हैं, हालांकि इसराइल ने इस समझौते से दूरी बना ली है।

समझौते की मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि समझौता अब बहुत करीब है। इस डील का मुख्य मकसद युद्ध को रोकना और Strait of Hormuz को फिर से खोलना है। अमेरिका के अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि यह समझौता होने की 80 से 85 प्रतिशत संभावना है। इस डील के तहत ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जाएगा, लेकिन उसे नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिल सकती है। इसके साथ ही दोनों तरफ से लगे समुद्री नाकाबंदी को हटाने की बात कही गई है।

पाकिस्तान की भूमिका और समय सीमा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने शनिवार, 13 जून 2026 को ऐलान किया कि शांति समझौते का फाइनल टेक्स्ट तैयार हो गया है। उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इस पर साइन हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने बाद में साफ किया कि साइनिंग 14 जून को नहीं बल्कि आने वाले कुछ दिनों में होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इसे एक बेहतरीन डील बताया है और इसराइल से कहा है कि अब इस युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है।

इसराइल की नाराजगी और सैन्य तनाव

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि उनका देश इस डील का हिस्सा नहीं बनेगा। इसराइल को डर है कि इस समझौते से ईरान की परमाणु क्षमता और Hezbollah जैसे समूहों को फायदा मिल सकता है। इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार इसराइल के पास रहेगा। दूसरी तरफ, 13 जून को US Central Command ने Strait of Hormuz के पास ईरान के कई ड्रोन गिराए हैं, जिससे पता चलता है कि बातचीत के बीच भी सैन्य तनाव बना हुआ है।