अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं। इस डील के बाद अब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव खत्म होगा और शांति बहाल होगी।

इस समझौते की प्रक्रिया 12 जून 2026 को शुरू हुई थी जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने युद्ध खत्म करने के लिए सहमति की घोषणा की थी। इसके बाद 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। 18 जून 2026 को यह समझौता पूरी तरह लागू हो गया और ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इसके 14 पॉइंट्स जारी किए।

समझौते की मुख्य बातें

  • दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।
  • अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
  • अमेरिका ने अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और हरकतों को पूरी तरह खत्म करने का वादा किया है।
  • ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित रास्ते को सुनिश्चित किया है, जो 60 दिनों तक मुफ्त रहेगा।
  • ईरान को 300 बिलियन डॉलर का फंड दिया जाएगा और उसकी जमी हुई संपत्तियां वापस की जाएंगी, साथ ही प्रतिबंधों में भी ढील मिलेगी।
  • ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है, वहीं अमेरिका ने ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को कम करने की अनुमति दी है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि यह समझौता अब अंतिम रूप ले चुका है और इसे लागू करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि स्विट्जरलैंड में कोई औपचारिक समारोह नहीं होगा क्योंकि हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किए गए हैं।

इस पूरी डील में पाकिस्तान के अलावा कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाई। अंतिम समझौते के लिए बातचीत अधिकतम 60 दिनों तक चलेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।