ईरान और अमेरिका के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजिटल तरीके से इस MoU पर साइन किए हैं। इस फैसले के बाद अब दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और सैन्य हमलों को रोकने की तैयारी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने गुरुवार, 18 जून 2026 को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस समझौते का नाम “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” रखा गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के साथ डिनर के दौरान इस पर साइन करने की बात कही थी।
समझौते की मुख्य बातें
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य ऑपरेशन अब पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।
- दोनों देश और उनके सहयोगी अब भविष्य में कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे और न ही बल प्रयोग की धमकी देंगे।
- ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही कहीं से खरीदेगा।
- अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई अपनी समुद्री नाकेबंदी को तुरंत हटाना शुरू करेगा और 30 दिनों के अंदर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा।
- ईरान ने तय किया है कि वह Strait of Hormuz से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी फीस के रास्ता देगा, जिसके बाद वह इसके लिए पैसे लेगा।
इस डिजिटल साइनिंग की वजह से अब 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होने वाली औपचारिक मीटिंग नहीं होगी। हालांकि, दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें अभी भी जेनेवा में मौजूद हैं और वे वहां मिल सकते हैं।
ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि Strait of Hormuz पर ईरान का पूरा हक है और 60 दिनों के बाद वहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस ली जाएगी। उन्होंने इस पूरे समझौते को अमेरिका की नाकामी बताया। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि अमेरिका ने ईरान का काफी पैसा लिया है, जिसे अब वापस करना होगा।