ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) कहा जा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते का मुख्य मकसद 2026 की जंग को खत्म करना है। इस ऐतिहासिक कदम से दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है और तनाव कम होने की संभावना है।

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समझौते की मुख्य बातें और शर्तें

यह समझौता 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच साइन हुआ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई और इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 18 जून 2026 से पूरी तरह लागू हो गया है।

इस डील के तहत कुछ अहम शर्तें तय की गई हैं:

  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
  • ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को फिर से खोलेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा।
  • अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाएगा और ईरान के जाम किए हुए फंड और संपत्ति वापस करेगा।
  • ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। परमाणु ईंधन के मुद्दे को IAEA की निगरानी में सुलझाया जाएगा।
  • अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका अपनी सेना को ईरान के आस-पास के इलाकों से हटा लेगा।
  • दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।

नेताओं ने क्या कहा

ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस MoU को एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सम्मान और स्वतंत्रता के जरिए शांति लाने का रास्ता है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ईरान के साथ अच्छी जान-पहचान थी, जिससे इस डील में बहुत मदद मिली।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने दोनों देशों के नेताओं को बधाई दी और इस प्रक्रिया में कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों के योगदान को भी सराहा।

ताजा हालात और अगली बैठक

20 जून 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से फोन पर बात की ताकि शांति वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके। 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Bürgenstock में तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी, जिसमें पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

हालांकि, इस बीच एक नया मोड़ आया है। ईरान की सैन्य कमान ने 20 जून 2026 को फिर से Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया। ईरान का कहना है कि इसराइल ने लेबनान में ceasefire के नियमों का उल्लंघन किया है, जो इस समझौते का एक मुख्य हिस्सा था। दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस समझौते पर संदेह जताया है और कहा है कि इसराइल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा।