पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक बहुत बड़ी डिप्लोमैटिक मीटिंग हुई, लेकिन यह किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। करीब 21 घंटे तक चली इस बातचीत के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधि वापस अपने देशों के लिए रवाना हो गए हैं। यह मौका ऐतिहासिक था क्योंकि 1979 की क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के अधिकारी एक ही कमरे में आमने-सामने बैठे थे।

इस मीटिंग में कौन शामिल था और क्या था मकसद

इस बातचीत में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के नेतृत्व में 70 से ज्यादा लोगों का दल आया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य 2026 के ईरान युद्ध के ceasefire को स्थिर करना और शांति की राह खोजना था।

बातचीत क्यों विफल हुई और मुख्य विवाद क्या रहा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने मीटिंग के बाद ऐलान किया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, इसलिए कोई समझौता नहीं हो सका। उन्होंने इसे ईरान के लिए बुरी खबर बताया। बातचीत के दौरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) सबसे बड़ा विवाद बना रहा, जिसे साफ करने के लिए अमेरिका ने अपने दो युद्धपोत भेजे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक ही मीटिंग में समझौता होने की उम्मीद किसी को नहीं थी, जबकि ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका के पुराने वादों पर भरोसा न करने की बात कही।

प्रमुख व्यक्तियों के बयान और उनकी प्रतिक्रिया

व्यक्ति मुख्य बयान/प्रतिक्रिया
JD Vance (US VP) ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानीं, यह उनके लिए बुरा है।
डोनाल्ड ट्रंप (US President) अमेरिका अंत में जीतेगा, हमने ईरान की सेना को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
एस्माइल बगई (ईरान विदेश मंत्रालय) एक ही सत्र में समझौता होने की उम्मीद नहीं थी।
शहबाज शरीफ (PM पाकिस्तान) उम्मीद है कि इन बातचीत से क्षेत्र में स्थायी शांति आएगी।
मोहम्मद बागर गालीबाफ (ईरान) अमेरिका के पुराने टूटे हुए वादों की वजह से उन पर संदेह है।
ट्रिटा पारसी (विशेषज्ञ) ईरान के बड़े प्रतिनिधिमंडल का आना उनकी गंभीरता को बताता है।