ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमले लगातार जारी हैं। पिछले नौ दिनों में इन हमलों के कारण ईरान में 1,255 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 12,000 लोग घायल हुए हैं। ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर डॉ अली जफरियन ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या आम नागरिकों की है। यह मिलिट्री ऑपरेशन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और इसका असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है।

हमलों से आम लोगों और इमारतों को कितना नुकसान हुआ?

इस्राइल और अमेरिका के जॉइंट हमले में ईरान के कई रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी के अनुसार, अब तक 6,668 सिविलियन यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है। 6 मार्च तक इस्राइल ने ईरान में 3,400 से ज्यादा ठिकानों पर हमला करने की बात कही थी।

  • 5,535 घर और 1,041 कमर्शियल दुकानें तबाह हुई हैं।
  • 65 स्कूल और 13 रेड क्रिसेंट सेंटर पर भी हमले हुए हैं।
  • शुरुआती डेटा के अनुसार, मरने वालों में 13 प्रतिशत महिलाएं और 180 बच्चे शामिल थे।

अस्पताल और मेडिकल स्टाफ पर इसका क्या असर पड़ा?

आम इमारतों के साथ-साथ ईरान के हेल्थकेयर सिस्टम को भी भारी नुकसान सहना पड़ा है। डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर के मुताबिक, हमलों के दौरान 11 हेल्थकेयर वर्कर की जान गई है और 55 घायल हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं पर हमले के कारण मरीजों का इलाज मुश्किल हो गया है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी मेडिकल सुविधाओं पर 13 हमलों की पुष्टि की है। राजधानी तेहरान का मुख्य Valiasr Burn Hospital काम करने की स्थिति में नहीं है। इसके अलावा 14 अन्य मेडिकल सेंटर भी हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे मेडिकल सहायता पहुंचाने में भारी दिक्कत हो रही है।