ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच जारी संघर्ष लगातार 13वें दिन भी जारी रहा। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने दुनिया से इस मामले में खामोश न रहने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन किया गया, तो भविष्य में कोई भी डील करना ईरान के लिए मुश्किल होगा।
हमलों का प्रभाव और ताजा स्थिति
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता Hossein Kermanpour के अनुसार, 27 जून से अब तक जारी हवाई हमलों में 55 लोगों की मौत हो गई है और 629 लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी हमलों में ईरान के कमांड सेंटर, ड्रोन स्टोरेज और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। ईरान की सेना ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दुश्मन के हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं और ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।
कुवैत पर असर और क्षेत्रीय तनाव
इस क्षेत्रीय तनाव का असर खाड़ी देशों तक पहुंच गया है। Kuwait में अधिकारियों ने जानकारी दी कि इराक के साथ लगते Abdali बॉर्डर पर ड्रोन और मिसाइलें गिरी हैं, जिन्हें वहां की सुरक्षा व्यवस्था ने रोकने की कोशिश की। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने जॉर्डन और फारस की खाड़ी वाले देशों को चेताया है कि यदि उन्होंने अमेरिकी ऑपरेशनों में मदद की, तो ईरान अपनी रक्षा में उनके ठिकानों को भी निशाना बना सकता है।
ईरान के अधिकारियों ने धमकी दी है कि अगर राष्ट्रपति Trump ने तेहरान या वहां के बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो वे तेल अवीव पर जवाबी कार्रवाई करेंगे और यमन के Houthi समूह से Bab al-Mandab जलडमरूमध्य में समुद्री नाकेबंदी करवाएंगे। वर्तमान में, मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं, हालांकि ईरान ने Strait of Hormuz के नियंत्रण से जुड़े अमेरिकी प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा है कि यदि ईरान हमला करता है, तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा।
