ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। 2 अप्रैल 2026 को ईरान के मिलिट्री कमांड ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका और इज़राइल ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नहीं समझते हैं। ईरान की तरफ से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज़ हो गया है। ईरान ने साफ किया है कि वे अपनी रणनीतिक क्षमताओं को अज्ञात जगहों से संचालित कर रहे हैं और किसी भी हमले का और भी विनाशकारी जवाब देंगे।

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ईरान की मिलिट्री और राष्ट्रपति ने क्या कहा है?

ईरान के मिलिट्री कमांड (खातम अल-अंबिया) ने साफ़ तौर पर अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी है कि वे ईरान की विशाल सैन्य ताकत से अनजान हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा है कि वे किसी भी समय सीमा या खतरे के दबाव में नहीं आएंगे। इसके अलावा, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिकी जनता को एक पत्र लिखकर कहा है कि इज़राइल अमेरिका को इस युद्ध में शामिल कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का इरादा किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है, लेकिन अगर उनकी ऊर्जा और औद्योगिक इकाइयों पर हमले हुए तो इसके नतीजे बहुत बुरे होंगे।

अमेरिका और यूएई की कार्रवाई और ताज़ा अपडेट क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों तक ईरान पर और भी कड़े हमले जारी रखेगा। ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका के मुख्य रणनीतिक लक्ष्य पूरे होने के करीब हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम लगातार ईरानी खतरों का सामना कर रहे हैं। इस युद्ध के दौरान अब तक की गई कार्रवाई का विवरण नीचे दिया गया है:

विवरण संख्या/जानकारी
1 अप्रैल को यूएई द्वारा रोकी गई मिसाइलें 5 बैलिस्टिक मिसाइलें
1 अप्रैल को यूएई द्वारा रोके गए ड्रोन 35 ड्रोन
युद्ध शुरू होने से अब तक कुल रोके गए ड्रोन 2,012 ड्रोन
कुल रोकी गई बैलिस्टिक मिसाइलें 438 मिसाइलें
अमेरिकी दूतावास की सलाह नागरिकों को इराक छोड़ने को कहा गया

इज़राइल की मिलिट्री ने भी पुष्टि की है कि उसने ईरान की तरफ से दागी गई कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया है। इस बीच, अमेरिकी खुफिया विभाग का मानना है कि ईरान फिलहाल युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत के मूड में नहीं है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है, क्योंकि हिज़बुल्ला और हूतियों ने भी इज़राइल की ओर हमले तेज़ कर दिए हैं।