ईरान ने अमेरिका और इसराइल के सामने रखी नई शर्तें, लेबनान में हमला रोकने और नाकाबंदी हटाने की मांग, व्यापारिक रास्तों पर मंडराया खतरा
ईरान ने अमेरिका और इसराइल के सामने बातचीत शुरू करने के लिए अपनी नई शर्तें रखी हैं। ईरान की मांग है कि इसराइल लेबनान में हिजबुल्लाह पर अपने सैन्य हमले तुरंत रोके। इसके साथ ही, ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी हटाने को कहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पूरे इलाके के व्यापारिक रास्तों में बड़ी रुकावट आ सकती है।
ईरान की चेतावनी और समुद्री व्यापार पर असर
अमेरिका ने 14 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह नाकाबंदी कर रखी है। US Central Command ने कन्फर्म किया है कि समुद्र के रास्ते ईरान का आर्थिक व्यापार पूरी तरह बंद हो चुका है। ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने कहा कि अगर नाकाबंदी हटती है, तभी इस्लामाबाद में बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका पीछे नहीं हटा, तो फारस की खाड़ी, लाल सागर और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को बाधित किया जा सकता है।
लेबनान में तनाव और इसराइल की कार्रवाई
लेबनान और इसराइल के बीच 17 अप्रैल 2026 को युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन जमीन पर हालात अब भी खराब हैं। इसराइल की सेना दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है। हिजबुल्लाह ने इसराइल और लेबनान के बीच होने वाली सीधी बातचीत को गलत बताया है। 22 अप्रैल को टायर में हुए एक इसराइली हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान में हिंसा नहीं रुकती, तब तक कोई भी समझौता संभव नहीं होगा।
अमेरिका का रुख और जहाजों की जब्ती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखने का फैसला किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि बातचीत के हिस्से के रूप में ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा। समुद्र में तनाव इतना बढ़ गया है कि 21 अप्रैल को अमेरिका ने एक ईरानी तेल टैंकर को पकड़ा, जिसके जवाब में 22 अप्रैल को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया।