ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। मंगलवार 7 अप्रैल को ईरान के कई शहरों पर भारी हवाई हमले किए गए, जिसमें शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है। वहीं कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि मरने वालों का आंकड़ा 34 से 49 के बीच हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को Strait of Hormuz खोलने के लिए मंगलवार रात तक का समय दिया है।

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ईरान में कहाँ-कहाँ हुए हमले और कितना हुआ नुकसान?

इसराइल और अमेरिका ने तेहरान सहित ईरान के 20 प्रांतों के करीब एक दर्जन शहरों में बमबारी की है। इस हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के इंटेलिजेंस चीफ मेजर जनरल माजिद खादेमी की मौत हो गई है। हमलों ने रिहायशी इलाकों, यूनिवर्सिटी, एयरपोर्ट्स और देश के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को भी नुकसान पहुँचाया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, तेहरान के रिहायशी इलाके में हुए हमले में 7 बच्चों की भी जान चली गई है।

खाड़ी देशों और इसराइल पर हमलों का क्या असर पड़ा?

ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें हैं, जिसका असर कुवैत और सऊदी अरब तक देखा गया है। खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती है:

  • Israel
  • क्षेत्र/देश नुकसान और घटना की जानकारी
    Kuwait अली अल सलेम एयर बेस पर ईरानी ड्रोन हमले में 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए।
    Saudi Arabia ईरान की तरफ से दागी गई 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को सऊदी ने हवा में ही नष्ट किया।
    ईरानी मिसाइल हमले में इसराइल में 4 लोगों की मौत की खबर है।
    Iran तेहरान और अन्य शहरों में मिसाइल साइट्स और बिजली घरों पर भारी हमला हुआ।

    ट्रम्प का नया अल्टीमेटम और आगे की स्थिति क्या है?

    राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर मंगलवार रात 8 बजे तक ईरान ने समुद्री रास्ता यानी Strait of Hormuz को पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली पैदा करने वाले पावर प्लांट को तबाह कर देगा। उन्होंने कहा कि वह ईरान के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी पर पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी तरफ, ईरान ने पाकिस्तान द्वारा दिए गए 45 दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी 10 शर्तें सामने रखी हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि आम नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।