ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों का असली मकसद ईरान के तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों पर कब्जा करना है। बघाई ने व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि यह युद्ध किसी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि आर्थिक लूट के लिए लड़ा जा रहा है। ईरान में युद्ध के 11वें दिन हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम जनता को ईंधन की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

ईरान ने तेल पर कब्जे को लेकर क्या दावे किए?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के एक वीडियो का जिक्र किया, जिसे उन्होंने ‘ईमानदारी का दुर्लभ क्षण’ बताया। उनका कहना है कि अमेरिका की मंशा ईरान के संसाधनों को लूटने की है।

  • आर्थिक मकसद: अमेरिका चाहता है कि ईरान और वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण पाकर बहुत पैसा कमाया जाए।
  • सत्ता परिवर्तन: अमेरिका का लक्ष्य ईरान में ऐसी सरकार लाना है जो उसके साथ मिलकर 31% वैश्विक तेल भंडार पर कब्जा कर सके।
  • NEDC की रिपोर्ट: व्हाइट हाउस की एनर्जी काउंसिल का कहना है कि वे ईरानी तेल को अपने हाथ में लेना चाहते हैं ताकि इसका खतरा खत्म हो सके।

युद्ध के 11वें दिन ईरान के ताजा हालात क्या हैं?

ईरान में पिछले 24 घंटों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। तेहरान के गवर्नर ने पुष्टि की है कि शनिवार को तेल डिपो पर हुए हमलों के बाद राजधानी में पेट्रोल की सप्लाई अस्थायी रूप से रुक गई है।

मुख्य जानकारी आंकड़े/अपडेट
कुल मौतें 1,255 लोग
घायल नागरिक 12,000 से अधिक
नया सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनी (Mojtaba Khamenei)
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026

ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर किसी पड़ोसी देश के आसमान या ज़मीन का इस्तेमाल उन पर हमले के लिए किया गया, तो उस जगह को भी वैध सैन्य निशाना माना जाएगा। फिलहाल ईरान ने किसी भी तरह की शांति वार्ता या सीजफायर की बात से साफ इनकार कर दिया है।