ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में दोनों देशों की सीधी मुलाकात की खबरें आई थीं, लेकिन ईरान ने साफ तौर पर इनका खंडन किया है। इस बीच अमेरिका ने अपने खास दूतों को पाकिस्तान भेजा है ताकि बातचीत के रास्ते खुले रह सकें और क्षेत्रीय शांति बनी रहे।
ईरान ने अमेरिका के साथ मीटिंग से क्यों किया इनकार?
ईरान के विदेश मंत्रालय और प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ उनकी कोई सीधी मुलाकात तय नहीं है। ईरान ने व्हाइट हाउस के उन दावों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि ईरान ने खुद बातचीत की मांग की थी। ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं, इसलिए वह सीधे बातचीत के मूड में नहीं है और अपनी बातें पाकिस्तान के जरिए पहुँचाएगा।
अमेरिका और पाकिस्तान की इसमें क्या भूमिका है?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को 25 अप्रैल को पाकिस्तान भेजा है ताकि ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक पुल की तरह काम कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच संदेश पहुँचाने में मदद कर रहा है।
आगे क्या होने वाला है और मौजूदा स्थिति क्या है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ सीजफायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों के लिए और समय मिल गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अब इस्लामाबाद के बाद ओमान और रूस का दौरा करेंगे। हालांकि दोनों देशों के दावों में अंतर है, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति की उम्मीदें अब भी बनी हुई हैं।