ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। रविवार, 19 जुलाई 2026 को ईरान के Abadan इलाके में मिसाइल हमले की खबर सामने आई है। Khuzestan प्रांत में हुए इस हमले में हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है। ईरानी अधिकारियों ने इस हमले के पीछे अमेरिका का हाथ होने का आरोप लगाया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव
ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया कि अमेरिका ने रविवार तड़के 3:39 बजे Darkhovin परमाणु संयंत्र पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया। वहीं, US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर अमेरिकी सेना लगातार आठ दिनों से ईरान के ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बना रही है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देने के लिए की गई है।
क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा पर असर
शुक्रवार, 18 जुलाई 2026 को जॉर्डन में हुए ईरानी हमले में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही पूरे इलाके में हलचल मची हुई है। जॉर्डन की सेना ने भी ईरानी मिसाइलों को आसमान में ही रोकने का दावा किया है। साथ ही, Kuwait में लगातार दूसरे दिन बिजली और पानी के प्लांट पर हमले की खबर आई है और Bahrain में सायरन बजने से लोगों में दहशत का माहौल रहा।
UAE के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति को देशों की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सहयोगियों को और अधिक हमलों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों में अमेरिकी हमलों में 50 लोग मारे गए हैं और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
