ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम समझौता (MoU) हुआ है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद है। इस डील के तहत अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को खत्म करने जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि अब दोनों देशों को समझौते में लिखी बातों का पूरी तरह पालन करना होगा ताकि बातचीत आगे बढ़ सके।

समझौते की मुख्य बातें और समय सीमा

  • हस्ताक्षर: यह MoU 14 से 17 जून 2026 के बीच इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किया गया और इसका औपचारिक कार्यक्रम शुक्रवार को Geneva, Switzerland में होगा।
  • नाकाबंदी का अंत: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगाई गई समुद्री नाकाबंदी को हटाना शुरू कर दिया है, जो 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
  • अगला कदम: औपचारिक साइनिंग के बाद 60 दिनों की बातचीत का समय होगा, जिसमें एक “फाइनल डील” की कोशिश की जाएगी।
  • तेल निर्यात: US Department of Treasury तेल निर्यात और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए तुरंत छूट (waivers) जारी करेगा।

बातचीत और मुख्य किरदार

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बताया कि आने वाली बातचीत में परमाणु मुद्दे और प्रतिबंधों को हटाने पर जोर रहेगा। इस चर्चा में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और ईरान के नेशनल पार्लियामेंट स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf शामिल होंगे। इसके साथ ही पाकिस्तान और कतर के प्रधानमंत्री भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। इस पूरे समझौते को करवाने में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और स्विट्जरलैंड ने साइनिंग में मदद की है।

डील की अन्य कड़ी शर्तें

  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए बंद होंगे।
  • परशियन गल्फ से ओमान की खाड़ी तक व्यापारिक जहाजों को 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा।
  • अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साथी मिलकर ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण प्लान तैयार करेंगे।
  • ईरान ने साफ किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को बनाए रखेगा।

अमेरिका और इजराइल का रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने शर्तों का उल्लंघन किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इस MoU का पूरा टेक्स्ट पब्लिक किया जाएगा। वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस समझौते को नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सेना (IDF) को बनाए रखेगा।