ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने 18 जुलाई 2026 को यह साफ कर दिया है कि वह अब अमेरिका के साथ हुए 14-पॉइंट समझौते (MoU) को नहीं मानता है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच फिर से टकराव की स्थिति बन गई है, जिसका सीधा असर अब समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।

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क्या है पूरा मामला

ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने बताया कि अमेरिका ने समझौते का पालन नहीं किया और सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खुद को इस समझौते से अलग कर लिया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही 8 जुलाई 2026 को इस समझौते को खत्म करने की घोषणा कर दी थी। अमेरिका ने 14 जुलाई 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव रखा है।

व्यापार और तेल कीमतों पर असर

इस बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude तेल की कीमतें बढ़कर 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। मध्य पूर्व में तनाव की वजह से ईरान ने फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी सेना (CENTCOM) के अनुसार, इस पूरे विवाद में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और एक लापता है। ईरान के 12 बिलियन डॉलर की संपत्ति अभी भी फ्रीज है और फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जिससे इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों और कामगारों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.