ईरान और अमेरिका के बीच चला आ रहा युद्ध अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है। दोनों देशों ने एक अहम समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे दुनिया भर में तनाव कम हुआ है। इस शांति समझौते की खबर मिलते ही उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति Shavkat Mirziyoyev ने ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian को बधाई संदेश भेजा है।

क्या है यह समझौता

इस समझौते को ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ कहा जा रहा है। इसे 14 जून 2026 को तैयार किया गया था और 17 जून को राष्ट्रपति Donald Trump और राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने डिजिटल तरीके से इस पर साइन किए। पाकिस्तान इस पूरे समझौते में मुख्य गारंटी देने वाले देश के रूप में शामिल रहा है। यह समझौता 18 जून 2026 से पूरी तरह लागू हो गया है।

आम लोगों और बाजार पर असर

समझौता लागू होते ही दुनिया भर में तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। 18 जून 2026 से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की अपनी समुद्री नाकाबंदी (Naval Blockade) हटा ली है, जिससे व्यापार फिर से शुरू हो सकेगा।

समझौते की मुख्य शर्तें

  • जंग का अंत: अब सभी मोर्चों पर सैन्य ऑपरेशन बंद कर दिए जाएंगे, जिसमें लेबनान भी शामिल है। दोनों देश अब एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करेंगे।
  • समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा। ईरान 30 दिनों के भीतर यहाँ से माइन हटाएगा और अमेरिका अपनी नाकाबंदी पूरी तरह खत्म करेगा।
  • पैसा और तेल: अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड और संपत्ति को वापस करेगा। साथ ही, ईरान को कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की अनुमति देने के लिए छूट जारी करेगा।
  • बातचीत का मौका: परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
  • नुकसान की भरपाई: दस्तावेज में युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे और पुनर्निर्माण योजना बनाने का भी जिक्र है।

इन देशों ने निभाई अहम भूमिका

इस शांति समझौते को करवाने में पाकिस्तान ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। इसके अलावा कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी मध्यस्थ के तौर पर काम किया। आपको बता दें कि यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था।