ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए एक समझौता (MoU) तैयार हुआ है। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस डील में देश के हितों की रक्षा करने के लिए सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन का शुक्रिया अदा किया है। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ है और इसे क्षेत्र की शांति के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ℹ️: US-Iran Agreement: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता, लेबनान में जंग खत्म, हजारों लोग लौटे अपने घर।
यह समझौता 14 जून 2026 की शाम को फाइनल हुआ और इसका औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को होगा। राष्ट्रपति Pezeshkian ने बताया कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के 90 प्रतिशत से ज़्यादा सदस्यों ने इस समझौते का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी शर्तों को पूरा करता है, तो यह देश के लिए एक सम्मानजनक जीत होगी।
समझौते के बाद क्या बदलेगा
- सैन्य कार्रवाई बंद: 14 जून की रात से लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
- समुद्री नाकाबंदी खत्म: ईरान के खिलाफ लगाई गई नेवल ब्लॉकड को तुरंत और पूरी तरह हटा लिया गया है।
- अमेरिकी रियायतें: रिपोर्ट के मुताबिक, बेरूत में इजराइल के हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने नाकाबंदी हटाने जैसे बड़े कदम उठाए ताकि ईरान की जवाबी कार्रवाई को रोका जा सके।
दुनिया भर की प्रतिक्रिया
इस समझौते का चीन ने स्वागत किया है और मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों की तारीफ की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मिडिल ईस्ट में स्थिरता लाने की एक नई उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति Pezeshkian ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर इजराइल की चिंता और गुस्सा इस बात का सबूत है कि ईरान इस डील में सफल रहा है।
समझौते के बाद अब बातचीत का दौर शुरू होगा, लेकिन यह तभी होगा जब अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि समझौते की पूरी जानकारी सही समय पर सार्वजनिक की जाएगी।