ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कर दिया है कि उनका देश अपनी जिम्मेदारियां तभी पूरी करेगा जब अमेरिका Memorandum of Understanding (MoU) का पालन करेगा। यह बयान उन्होंने सोशल मीडिया और धार्मिक नेताओं के साथ एक मुलाकात के दौरान दिया। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि अमेरिका अपनी शर्तों को कितनी गंभीरता से लेता है।
क्या है यह समझौता
बता दें कि 17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच Islamabad Memorandum of Understanding पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का मुख्य मकसद 2026 के ईरान युद्ध को खत्म करना है। इसमें परमाणु कार्यक्रम पर एक बड़ी डील के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। समझौते के तहत दोनों देशों ने लड़ाई रोकने और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। ईरान ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
अमेरिका और ईरान की शर्तें
अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, Strait of Hormuz को फिर से खोलने और ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करने का वादा किया है। इसी सिलसिले में 22 जून 2026 को US Department of the Treasury के OFAC ने General License X जारी किया। इससे 21 अगस्त 2026 तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के लेन-देन की अनुमति मिली है।
दूसरी तरफ, ईरान ने Strait of Hormuz से जहाजों के आने-जाने की आजादी देने का वादा किया है। समझौते के मुताबिक, ईरान 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की पूरी कोशिश करेगा।
ताज़ा हालात और विवाद
29 जून 2026 को राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि कतर में रखे ईरान के 12 अरब डॉलर में से 6 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और कतर ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है।
- दोनों देश इस हफ्ते कतर में अपनी टीम भेजेंगे।
- ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसकी टीम अंतरिम समझौते पर चर्चा करेगी, लेकिन अमेरिका के अधिकारियों से सीधी बात नहीं होगी।
- एक अमेरिकी अधिकारी ने कन्फर्म किया है कि Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाज अब आसानी से आ-जा रहे हैं।
- ऐसी खबरें भी हैं कि ओमान और ईरान अब Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस लेने पर विचार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने पहले भी कहा था कि बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभाते हैं या नहीं।
