ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कर दिया है कि उनका देश अमेरिका के साथ हुए समझौते (MoU) की सभी शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को भी अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। राष्ट्रपति ने कहा कि यह दोनों देशों के बीच का मामला है और ईरान का पालन पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिकी पक्ष समझौते पर कितना टिकता है।

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यह समझौता 17 जून 2026 को राष्ट्रपति Pezeshkian और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच डिजिटल तरीके से साइन किया गया था। इसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ कहा जाता है, जिसे तैयार करवाने में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई थी। यह 14 पॉइंट का एक अंतरिम समझौता है, जिसका मकसद युद्ध रोकना और एक स्थाई शांति समझौते की तरफ बढ़ना है।

समझौते की मुख्य शर्तें

इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कई अहम बातों पर सहमति जताई थी, जो इस प्रकार हैं:

  • सैन्य अभियान बंद: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने का वादा किया गया।
  • समुद्री नाकेबंदी: अमेरिका ने ईरान पर लगी अपनी नेवल नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाने पर सहमति जताई।
  • Strait of Hormuz: ईरान ने 60 दिनों तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित रखने और कोई शुल्क न लेने का वादा किया।
  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने पुष्टि की है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने यूरेनियम स्टॉक के मामले को सुलझाएगा।
  • तेल प्रतिबंध: अमेरिका ने जनरल लाइसेंस X जारी कर 21 अगस्त 2026 तक ईरानी तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाया है।

संपत्तियों और पुनर्निर्माण को लेकर भी चर्चा हुई है। राष्ट्रपति Pezeshkian का दावा है कि कतर में जमा ईरान की 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है। इसके अलावा, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के प्लान पर भी बात हुई है।

ताज़ा हालात और तनाव

पिछले कुछ दिनों में हालात फिर से बिगड़ गए थे। 27 और 28 जून को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य झड़पें हुईं। अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया, जबकि ईरान ने इन आरोपों को गलत बताया। फिलहाल दोनों देश फिलहाल के लिए पीछे हटने पर सहमत हुए हैं।

1 जुलाई को कतर के दोहा में दोनों देशों के बीच बातचीत होनी तय हुई है। हालांकि, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें तकनीकी टीमों की बैठक की बात कही गई थी। उन्होंने साफ किया कि तकनीकी बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका अपनी शर्तों को पूरा करेगा और तारीख व जगह पर सहमति बनेगी।