ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को चेतावनी दी थी कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी ईरान को पूरी तरह पंगु बना रही है। इसी दबाव के बाद दोनों देशों के बीच समझौता हुआ और बंदरगाहों को फिर से खोला गया।

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दरअसल, अमेरिकी सेना ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी थी। यह कदम इस्लामाबाद बातचीत विफल होने के बाद उठाया गया था। इस वजह से ईरान के जहाजों का आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया था, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

इस समस्या को सुलझाने के लिए 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक समझौता (MoU) साइन किया। इस समझौते में अमेरिका द्वारा नाकाबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बात कही गई थी। अगले ही दिन, 18 जून को सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी खत्म कर दी।

हालिया अपडेट्स की बात करें तो 1 जुलाई 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। अब दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ते और ईरान के फंसे हुए पैसों को निकालने पर बात कर रहे हैं।

इसी बीच ईरान की सेना ने सख्त चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों को ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों का ही पालन करना होगा, वरना उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति फिलहाल रोक दी है।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने बताया कि इस समझौते की वजह से ईरान अपने 24 अरब डॉलर के जमा किए गए पैसों में से आधे पैसे वापस ले सकेगा।

Aanya

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