अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी किए जाने के बाद अब मामला काफी गंभीर हो गया है. ईरान के सैन्य मुख्यालय ने साफ कहा है कि अगर यह नाकाबंदी जारी रही तो उन्हें अमेरिकी सेना के कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा. इस तनाव की वजह से समुद्री रास्तों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बुरा असर पड़ सकता है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मची है.

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ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?

ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी (Tasnim News Agency) के मुताबिक, ईरान के सेंट्रल हेडक्वार्टर ऑफ हजरत खतम अल-अनबिया ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को ईरान की बढ़ती ताकत और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. ईरान ने कहा कि अमेरिकी सेना ने पहले भी ईरान की हमलावर क्षमताओं का अनुभव किया है. इस विवाद में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की स्थिति सबसे नाजुक है. मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघारी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जब तक अमेरिकी सेना वहां से नहीं हटती, यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा और बिना अनुमति किसी भी जहाज को वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा.

अमेरिका का इस नाकाबंदी पर क्या स्टैंड है?

अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी सेना उन सभी ईरानी जहाजों को नष्ट कर देगी जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माइन बिछाने की कोशिश करेंगे. उन्होंने बताया कि ईरानी पोर्ट्स की नाकाबंदी अब और सख्त हो रही है और यह दुनिया भर में फैल रही है. जनरल डैन केन ने वैश्विक शिप ऑपरेटरों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने नाकाबंदी का पालन नहीं किया तो बल का प्रयोग किया जाएगा. अमेरिकी नौसेना ने अब तक 34 जहाजों को वापस मोड़ा है और हाल ही में अरब सागर में एक ईरानी जहाज ‘तौस्का’ (Touska) को रोककर उसे निष्क्रिय कर दिया गया.

तनाव के बीच ताज़ा हालात और असर क्या हैं?

इस सैन्य तनाव के साथ-साथ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव भी बढ़ गया है. हाल ही की घटनाओं की सूची नीचे दी गई है:

  • अमेरिकी प्रतिबंध: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान से कच्चा तेल खरीदने के आरोप में चीन की एक बड़ी तेल रिफाइनरी और 40 शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं.
  • जहाजों की जब्ती: ईरान ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास MSC Francesca और Epaminondas नाम के दो कमर्शियल कंटेनर जहाजों को जब्त किया है.
  • वार्ता की स्थिति: अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जा रहे थे, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ उनकी कोई बैठक तय नहीं है.
  • ईरान का दावा: ईरानी अधिकारियों ने कहा कि जब तक अमेरिका अपनी समुद्री नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक वाशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत का कोई मतलब नहीं है.